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श्री सूक्तम् PDF

श्री सूक्तम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥

Hiranyavarnam harinim suvarnarajatasrajam Chandram hiranmayim lakshmim jatavedo ma avaha

हे जातवेदा (अग्नि)! स्वर्ण-वर्ण वाली, हरिणी-सी, सोने-चाँदी के हारों से सज्जित, चन्द्र-सी, स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे लिए ले आओ।

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥

Tam ma avaha jatavedo lakshmimanapagaminim Yasyam hiranyam vindeyam gamashvam purushanaham

हे जातवेदा! उस अविचल लक्ष्मी को मेरे लिए ले आओ, जिसकी कृपा से मैं स्वर्ण, गाय, अश्व और पुत्र प्राप्त करूँ।

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् । श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मादेवीर्जुषताम् ॥

Ashvapurvam rathamadhyam hastinadaprabodhinim Shriyam devimupahvaye shrirmadevirjushatam

अश्वों से युक्त, रथों के मध्य विराजमान, गजों के नाद से जागृत — उस श्री देवी का मैं आवाहन करता हूँ; श्री मुझ पर प्रसन्न हों।

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् । पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥

Kam sosmitam hiranyaprakaramardram jvalantim triptam tarpayantim Padme sthitam padmavarnam tamihopahvaye shriyam

मन्द मुस्कान वाली, स्वर्ण से घिरी, करुणा-आर्द्र, तेजस्विनी, तृप्त और तृप्त करने वाली, कमल पर विराजमान, कमल-वर्ण वाली — उस श्री का मैं यहाँ आवाहन करता हूँ।

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् । तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ॥

Chandram prabhasam yashasa jvalantim shriyam loke devajushtamudaram Tam padminimim sharanamaham prapadyelakshmirme nashyatam tvam vrine

चन्द्र-सी, प्रभामयी, यश से देदीप्यमान, देवों से पूजित, उदार, कमलहस्ता श्री की मैं शरण लेता हूँ; मेरी दरिद्रता (अलक्ष्मी) नष्ट हो।

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः । तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥

Adityavarne tapasodhijato vanaspatistava vrikshotha bilvah Tasya phalani tapasa nudantu mayantarayashcha bahya alakshmih

हे सूर्यवर्णा! तुम्हारे तप से वनस्पति-राज बिल्ववृक्ष उत्पन्न हुआ; उसके फल अपने प्रभाव से मेरी भीतरी-बाहरी दरिद्रता को दूर करें।

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह । प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ॥

Upaitu mam devasakhah kirtishcha manina saha Pradurbhutosmi rashtresmin kirtimriddhim dadatu me

देवसखा (कुबेर) और कीर्ति मणि सहित मेरे पास आएँ; इस राष्ट्र में जन्म लेकर मुझे कीर्ति और समृद्धि प्राप्त हो।

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् । अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात् ॥

Kshutpipasamalam jyeshthamalakshmim nashayamyaham Abhutimasamriddhim cha sarvam nirnuda me grihat

क्षुधा, तृष्णा और मलिनता रूपी ज्येष्ठा अलक्ष्मी का मैं नाश करता हूँ; हे लक्ष्मी! मेरे घर से सब अभाव और दुर्भाग्य को दूर करो।

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् । ईश्वरीग्ं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥

Gandhadvaram duradharsham nityapushtam karishinim Ishvarigm sarvabhutanam tamihopahvaye shriyam

सुगन्धमयी, अजेय, नित्य पुष्ट, समृद्धिशालिनी, समस्त प्राणियों की ईश्वरी — उस श्री का मैं यहाँ अपने लिए आवाहन करता हूँ।

मनस: काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि । पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यश: ॥

Manasa: kamamakutim vachah satyamashimahi Pashunam rupamannasya mayi shrih shrayatam yasha:

हम मन की कामना और संकल्प, वाणी का सत्य, पशुओं का रूप और अन्न की समृद्धि प्राप्त करें; मुझमें श्री और यश का वास हो।

कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम । श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ॥

Kardamena prajabhuta mayi sambhava kardama Shriyam vasaya me kule mataram padmamalinim

हे कर्दम! सन्तान रूप में मुझमें उत्पन्न हो; कमलमालिनी माता लक्ष्मी को मेरे कुल में निवास कराओ।

आप: सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे । नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ॥

Apa: srijantu snigdhani chiklita vasa me grihe Ni cha devim mataram shriyam vasaya me kule

जल स्नेहयुक्त सृष्टि करे; हे चिक्लीत! मेरे घर में वास करो, और देवी माता श्री को वहाँ निवास कराओ।

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥

Ardram pushkarinim pushtim pingalam padmamalinim Chandram hiranmayim lakshmim jatavedo ma avaha

आर्द्र, सरोवरवासिनी, पुष्टिदायिनी, पिंगल वर्ण, कमलमालिनी, चन्द्र-सी, स्वर्णमयी लक्ष्मी को — हे जातवेदा! मेरे लिए ले आओ।

आर्द्रां य: करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् । सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥

Ardram ya: karinim yashtim suvarnam hemamalinim Suryam hiranmayim lakshmim jatavedo ma avaha

करुणामयी, गजसेविता, स्वर्णमयी, हेममालिनी, सूर्य-सी, स्वर्णमयी लक्ष्मी को — हे जातवेदा! मेरे लिए ले आओ।

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान्विन्देयं पुरुषानहम् ॥

Tam ma avaha jatavedo lakshmimanapagaminim Yasyam hiranyam prabhutam gavo dasyoshvanvindeyam purushanaham

हे जातवेदा! उस अविचल लक्ष्मी को मेरे लिए ले आओ, जिसकी कृपा से मुझे प्रचुर स्वर्ण, गाय, सेवक, अश्व और पुत्र प्राप्त हों।