मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो PDF
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो। ख्याल परै ये सखा सबै मिलि, मेरैं मुख लपटायो॥
Maiya mori main nahin makhan khayo Khyal parai ye sakha sabai mili, merain mukh lapatayo
मैया मेरी, मैंने माखन नहीं खाया! इन सखाओं ने मिलकर मेरे मुँह पर लपेट दिया।
देखि तुही छींके पर भाजन, ऊँचे धरि लटकायो। हौं जु कहत नान्हें कर अपने, मैं कैसें करि पायो॥
Dekhi tuhi chheenke par bhajan, oonche dhari latkayo Haun ju kahat naanhe kar apne, main kaisen kari payo
तू ही देख — छींके पर बर्तन तो ऊँचे लटका हुआ था; और मेरे ये नन्हे हाथ — मैं भला कैसे पा सकता था?
मुख दधि लेपन कर पुनि गोरस, डारि सबनि के आगे। लकुटी कांधे गोधन गैयाँ, चलत भयो पग लागे॥
Mukh dadhi lepan kar puni goras, daari sabani ke aage Lakuti kaandhe godhan gaiyan, chalat bhayo pag laage
(फिर भी) मुख पर दही लपेटे, सबके आगे गोरस ढुलकाकर, कंधे पर लकुटी रखे गायों के संग चल पड़े, नन्हे पग लड़खड़ाते हुए।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
Surdas tab bihansi Jasoda, lai ur kanth lagayo
सूरदास कहते हैं: तब यशोदा हँसकर बालकृष्ण को हृदय से लगा लेती हैं।