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श्री काल भैरव आरती PDF

श्री काल भैरव आरती की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा । जय काली और गौर देवी कृत सेवा ॥

Jaya bhairava deva prabhu jaya bhairava deva Jaya kali aura gaura devi krita seva

भगवान भैरव की जय हो, प्रभु भैरव की जय; जिनकी सेवा स्वयं काली और गौरी देवी करती हैं।

तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक । भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥

Tumhi papa uddharaka duhkha sindhu taraka Bhaktom ke sukha karaka bhishana vapu dharaka

आप ही पापों से उद्धार करने वाले और दुःख-सागर से तारने वाले हैं; भक्तों को सुख देने वाले, यद्यपि आप भीषण रूप धारण करते हैं।

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी । महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥

Vahana shvana virajata kara trishula dhari Mahima amita tumhari jaya jaya bhayahari

श्वान (कुत्ते) पर विराजमान, हाथ में त्रिशूल धारण किए हुए; आपकी महिमा अपार है — जय हो, जय हो, हे भयहारी!

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे । चौमुख दीपक दर्शन दुःख खोवे ॥

Tuma bina deva seva saphala nahim hove Chaumukha dipaka darshana duhkha khove

हे देव! आपके बिना कोई सेवा-पूजा सफल नहीं होती; आपके चौमुखी दीपक के दर्शन से दुःख दूर हो जाते हैं।

तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी । कृपा कीजिये भैरव करिए नहीं देरी ॥

Tela chataki dadhi mishrita bhashavali teri Kripa kijiye bhairava karie nahim deri

तेल, चुटकी (सिंदूर) और दही का मिश्रित भोग आपको अर्पित है; हे भैरव! कृपा कीजिए, देर न कीजिए।

पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू दमकावत । बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत ॥

Panva ghungharu bajata aru damaru damakavata Batukanatha bana balaka jana mana harashavata

आपके चरणों में घुँघरू बजते हैं और डमरू डमकता है; बटुकनाथ बनकर बाल-रूप में आप सबके मन को हर्षित करते हैं।

बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावे । कहे धरनीधर नर मनवांछित फल पावे ॥

Batukanatha ji ki arati jo koi nara gave Kahe dharanidhara nara manavamchhita phala pave

जो कोई भी बटुकनाथ जी की यह आरती गाता है, धरनीधर कहते हैं, वह मनवांछित फल पाता है।