दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् PDF
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरभूषणाय। कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Vishveshvaraya Narakarnava Taranaya Karnamritaya Shashishekharabhushanaya Karpurakanti Dhavalaya Jatadharaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya
विश्वेश्वर, नरक रूपी सागर से तारने वाले, कर्णों को अमृत-से प्रिय, चन्द्रशेखर भूषण वाले — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।
गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकंकणाय। गंगाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Gauripriyaya Rajanishakala Dharaya Kalantakaya Bhujagadhipa Kankanaya Gangadharaya Gajaraja Vimardanaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya
गौरीप्रिय, चन्द्रकला धारण करने वाले, काल के अन्तक, सर्पराज का कंकण पहनने वाले — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।
भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय। ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Bhaktipriyaya Bhavarogabhayapahaya Ugraya Durgabhava Sagara Taranaya Jyotirmayaya Gunanama Sunrityakaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya
भक्तिप्रिय, संसार के रोग और भय को हरने वाले, उग्र, दुर्गम भवसागर से तारने वाले — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।
चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय। मंजीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Charmambaraya Shavabhasma Vilepanaya Bhalekshanaya Manikundalamandtaya Manjeerapadayugalaya Jatadharaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya
चर्म-वस्त्रधारी, शव-भस्म से विलेपित, भाल पर तीसरे नेत्र वाले, मणिकुण्डलों से सुशोभित — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।
पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय। आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Panchananaya Phaniraja Vibhushanaya Hemamshukaya Bhuvanatraya Manditaya Anandabhumivaradaya Tamomayaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya
पञ्चानन (पाँच मुख वाले), फणिराज से विभूषित, स्वर्ण-वस्त्रधारी, तीनों भुवनों के आभूषण — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।
भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय। नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Bhanupriyaya Bhavasagara Taranaya Kalantakaya Kamalasana Poojitaya Netratrayaya Shubhalakshana Lakshitaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya
भानुप्रिय, भवसागर से तारने वाले, काल के अन्तक, कमलासन (ब्रह्मा) से पूजित — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।
रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय। पुण्याय पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Ramapriyaya raghunathavarapradaya Nagapriyaya narakarnavataranaya Punyaya punyabharitaya surarchitaya Daridryaduhkhadahanaya namah shivaya
उन शिव को नमस्कार — जो राम के प्रिय और रघुनाथ को वरदान देने वाले हैं; नागों के प्रिय, नरक-रूपी सागर से तारने वाले; पुण्यस्वरूप, पुण्य से परिपूर्ण, देवताओं द्वारा पूजित — जो दारिद्र्य के दुःख को भस्म कर देते हैं।
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीताप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय। मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥
Mukteshvaraya phaladaya ganeshvaraya Gitapriyaya vrishabheshvaravahanaya Matangacharmavasanaya maheshvaraya Daridryaduhkhadahanaya namah shivaya
उन शिव को नमस्कार — जो मुक्ति के ईश्वर, फलदाता और गणों के स्वामी हैं; गीत के प्रेमी, वृषभराज (नन्दी) पर सवार; गजचर्म धारण करने वाले महेश्वर — जो दारिद्र्य के दुःख को भस्म कर देते हैं।
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्। सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्। त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्॥
Vasishthena kritam stotram sarvaroganivaranam Sarvasampatkaram shighram putrapautradivardhanam Trisandhyam yah pathennityam sa hi svargamavapnuyat
महर्षि वसिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र समस्त रोगों का निवारण करने वाला, शीघ्र ही सब प्रकार की सम्पत्ति देने वाला और पुत्र-पौत्रादि की वृद्धि करने वाला है। जो प्रतिदिन त्रिकाल (प्रातः, मध्याह्न, सायं) इसका पाठ करता है, वह निश्चय ही स्वर्ग को प्राप्त होता है।