Mantra.Tips
👑

नेतृत्व और आदर्श पर गीता के श्लोक

श्रेष्ठ पुरुष जो करता है, सब उसका अनुसरण करते हैं। निष्काम कर्म और आदर्श द्वारा नेतृत्व पर गीता।

Gita 3.20

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः। लोकसंग्रहमेवापि संपश्यन्कर्तुमर्हसि॥

जनकादि (ज्ञानी जन) भी कर्म द्वारा ही संसिद्धि को प्राप्त हुये लोक संग्रह (लोक रक्षण) को भी देखते हुये; तुम कर्म करने योग्य हो।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 3.21

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, अन्य लोग भी वैसा ही अनुकरण करते हैं; वह पुरुष जो कुछ प्रमाण कर देता है, लोग भी उसका अनुसरण करते हैं।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 3.25

सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्िचकीर्षुर्लोकसंग्रहम्॥

हे भारत ! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जैसे कर्म करते हैं वैसे ही विद्वान् पुरुष अनासक्त होकर, लोकसंग्रह (लोक कल्याण) की इच्छा से कर्म करे।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 18.46

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्।स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः॥

जिस (परमात्मा) से भूतमात्र की प्रवृत्ति अर्थात् उत्पत्ति हुई है और जिससे यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त है, उस (परमात्मा) की स्वकर्म द्वारा पूजा करके मनुष्य सिद्धि को प्राप्त होता है।।

यह श्लोक पढ़ें

और विषय देखें

⚔️ कर्म और निष्काम कर्म पर गीता के श्लोक🪔 आत्मा और अमरत्व पर गीता के श्लोक🙏 भक्ति और शरणागति पर गीता के श्लोक🕊️ शांति और भय पर विजय के गीता श्लोक🧘 ध्यान और मन पर गीता के श्लोक⚖️ समता और वैराग्य पर गीता के श्लोक📿 ज्ञान और विवेक पर गीता के श्लोक🕉️ ईश्वर के स्वरूप पर गीता के श्लोक🛕 धर्म और कर्तव्य पर गीता के श्लोक🌅 मृत्यु और अंतिम यात्रा पर गीता के श्लोक🧘‍♂️ योग पर गीता के श्लोक🎯 सफलता और कर्मकुशलता पर गीता के श्लोक🔥 क्रोध, काम और इंद्रियों पर गीता के श्लोक🌸 सुख और संतोष पर गीता के श्लोक🤲 करुणा और क्षमा पर गीता के श्लोक🌱 श्रद्धा पर गीता के श्लोक🍃 आहार और संयम पर गीता के श्लोक🧵 तीन गुणों पर गीता के श्लोक काल और अनित्यता पर गीता के श्लोक💎 आत्म-साक्षात्कार पर गीता के श्लोक