Mantra.Tips
⚔️

कर्म और निष्काम कर्म पर गीता के श्लोक

गीता का सार: अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से करो, पर फल की आसक्ति छोड़ दो। ये श्लोक कर्मयोग — निष्काम कर्म का मार्ग — बताते हैं।

Gita 2.47

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

कर्म करने मात्र में तुम्हारा अधिकार है? फल में कभी नहीं। तुम कर्मफल के हेतु वाले मत होना और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 2.48

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

हे धनंजय आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समभाव होकर योग में स्थित हुये तुम कर्म करो। यह समभाव ही योग कहलाता है।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 3.8

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः॥

तुम (अपने) नियत (कर्तव्य) कर्म करो क्योंकि अकर्म से श्रेष्ठ कर्म है। तुम्हारे अकर्म होने से (तुम्हारा) शरीर निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 3.19

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर। असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः॥

इसलिए, तुम अनासक्त होकर सदैव कर्तव्य कर्म का सम्यक् आचरण करो; क्योकि, अनासक्त पुरुष कर्म करता हुआ परमात्मा को प्राप्त होता है।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 3.35

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥

सम्यक् प्रकार से अनुष्ठित परधर्म की अपेक्षा गुणरहित स्वधर्म का पालन श्रेयष्कर है; स्वधर्म में मरण कल्याणकारक है (किन्तु) परधर्म भय को देने वाला है।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 4.18

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः। स बुद्धिमान् मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्॥

जो पुरुष कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखता है, वह मनुष्यों में बुद्धिमान है, वह योगी सम्पूर्ण कर्मों को करने वाला है।।

यह श्लोक पढ़ें
Gita 18.47

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्॥

सम्यक् अनुष्ठित परधर्म की अपेक्षा गुणरहित स्वधर्म श्रेष्ठ है। (क्योंकि) स्वभाव से नियत किये गये कर्म को करते हुए मनुष्य पाप को नहीं प्राप्त करता।।

यह श्लोक पढ़ें

और विषय देखें

🪔 आत्मा और अमरत्व पर गीता के श्लोक🙏 भक्ति और शरणागति पर गीता के श्लोक🕊️ शांति और भय पर विजय के गीता श्लोक🧘 ध्यान और मन पर गीता के श्लोक⚖️ समता और वैराग्य पर गीता के श्लोक📿 ज्ञान और विवेक पर गीता के श्लोक🕉️ ईश्वर के स्वरूप पर गीता के श्लोक🛕 धर्म और कर्तव्य पर गीता के श्लोक🌅 मृत्यु और अंतिम यात्रा पर गीता के श्लोक🧘‍♂️ योग पर गीता के श्लोक🎯 सफलता और कर्मकुशलता पर गीता के श्लोक🔥 क्रोध, काम और इंद्रियों पर गीता के श्लोक🌸 सुख और संतोष पर गीता के श्लोक🤲 करुणा और क्षमा पर गीता के श्लोक🌱 श्रद्धा पर गीता के श्लोक🍃 आहार और संयम पर गीता के श्लोक🧵 तीन गुणों पर गीता के श्लोक काल और अनित्यता पर गीता के श्लोक👑 नेतृत्व और आदर्श पर गीता के श्लोक💎 आत्म-साक्षात्कार पर गीता के श्लोक