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भगवद् गीता 1.16

अध्याय 1, श्लोक 16

अध्याय 1: Arjun Viṣhād Yogअर्जुनविषादयोग

अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः। नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥

लिप्यंतरण

anantavijayaṁ rājā kuntī-putro yudhiṣhṭhiraḥ nakulaḥ sahadevaśhcha sughoṣha-maṇipuṣhpakau

अर्थ

कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्त विजय नामक शंख और नकुल व सहदेव ने क्रमश: सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये।

शब्दार्थ
ananta-vijayamthe conch named Anantavijayrājākingkuntī-putraḥson of KuntiyudhiṣhṭhiraḥYudhishthirnakulaḥNakulsahadevaḥSahadevchaandsughoṣha-maṇipuṣhpakauthe conche shells named Sughosh and Manipushpak
व्याख्या

No commentary.

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद् गीता 1.16 का अर्थ क्या है?
कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्त विजय नामक शंख और नकुल व सहदेव ने क्रमश: सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये।
यह श्लोक भगवद् गीता के किस अध्याय का है?
यह श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 1 (Arjun Viṣhād Yog — Arjuna's Dilemma) का 16वाँ श्लोक है।